भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के हालिया पूर्वानुमान के अनुसार देश के उत्तरी हिस्सों में मौसम एक बार फिर करवट ले रहा है। एक अत्यंत प्रभावशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण अगले तीन दिनों तक उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में भारी हलचल देखने को मिल सकती है। इस मौसमी बदलाव का असर राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में बादलों की आवाजाही के साथ स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश का संकट
हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे कुल्लू, मनाली और लाहौल-स्पीति में भारी हिमपात की शुरुआत हो चुकी है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी और चमोली जैसे जिलों में भी अगले 72 घंटों तक बर्फबारी जारी रहने की संभावना है। पहाड़ों पर हो रही इस बर्फबारी के कारण मैदानी इलाकों की ओर बर्फीली हवाएं चलेंगी, जिससे दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में कड़ाके की ठंड और शीत लहर का दौर वापस लौट सकता है।
पंजाब और राजस्थान समेत कई राज्यों में ओलावृष्टि की संभावना
मैदानी इलाकों के लिए मौसम विभाग ने मध्यम से भारी बारिश का अनुमान जताया है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के उत्तरी जिलों जैसे श्रीगंगानगर और अलवर में बारिश के साथ ओलावृष्टि की चेतावनी दी गई है। यह मौसमी सिस्टम धीरे-धीरे पूर्व की ओर बढ़ रहा है, जिसके प्रभाव से उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में भी हल्की बूंदाबांदी और घने कोहरे की स्थिति बनी रह सकती है। तापमान में अचानक आने वाली इस गिरावट से जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।
किसानों के लिए विशेष कृषि परामर्श और सावधानी
मौसम में आने वाला यह बदलाव फसलों के लिए संवेदनशील समय है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे आने वाले 72 घंटों के दौरान सिंचाई और कीटनाशकों के छिड़काव को टाल दें। ओलावृष्टि से सरसों और सब्जियों की फसलों को बचाने के लिए उचित उपाय करना आवश्यक है। साथ ही खेतों में जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त रखें ताकि बारिश का पानी जमा होकर फसलों को नुकसान न पहुँचाए।
अस्वीकरण: यह जानकारी वर्तमान मौसम विश्लेषण और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। मौसम की स्थिति में किसी भी तात्कालिक बदलाव के लिए कृपया अपने स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग के आधिकारिक बुलेटिन का पालन करें।









